बनारस (वाराणसी) में साझा संस्कृति मंच की ओर से एक महत्वपूर्ण शांति मार्च का आयोजन किया गया, जिसमें अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर थोपे गए विनाशकारी युद्ध के खिलाफ आवाज़ उठाई गई। यह मार्च सिगरा स्थित शहीद उद्यान से शुरू होकर भारत माता मंदिर तक निकाला गया।
इस मार्च में बड़ी संख्या में छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने भाग लिया। सभी ने एक स्वर में युद्ध के खिलाफ और शांति के समर्थन में अपनी आवाज़ बुलंद की। यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि मानवता, पर्यावरण और वैश्विक शांति के लिए एक सशक्त अपील थी।





मुख्य उद्देश्य
इस शांति मार्च का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में बढ़ती हिंसा और युद्ध की राजनीति के खिलाफ जनजागरण करना था। वक्ताओं ने कहा कि युद्ध कभी समाधान नहीं होता, बल्कि यह मानव जीवन, पर्यावरण और आर्थिक स्थिरता को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
प्रमुख मांगें
इस कार्यक्रम के तहत साझा संस्कृति मंच ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:
- युद्ध को “उत्सव” बनाने वाली मीडिया की जवाबदेही तय की जाए।
- महंगाई पर नियंत्रण का ठोस वादा किया जाए।
- साम्राज्यवादी युद्ध तुरंत बंद किए जाएं।
- पर्यावरण और मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- भारत सरकार शांति और कूटनीति की दिशा में पहल करे।




शांति और कूटनीति का संदेश
मार्च के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे देश, जिसकी पहचान अहिंसा और शांति की रही है, को वैश्विक स्तर पर शांति स्थापना में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि आज के समय में उनकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।




निष्कर्ष
यह शांति मार्च केवल बनारस तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक व्यापक संदेश था कि आम नागरिक युद्ध और हिंसा के खिलाफ खड़े हैं। साझा संस्कृति मंच की यह पहल वैश्विक स्तर पर शांति और संवाद की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
Global Gandhi के मंच से यह आवाज़ दुनिया भर के लोगों तक पहुंचे—यही इस अभियान का उद्देश्य है।





