हिंसा और साम्प्रदायिक तनाव के दौर में सीमांत गांधी पर चर्चा बेहद जरूरी

5 मार्च 2026 को, एचकेबीकेए डिग्री कॉलेज में भारत रत्न अब्दुल गफ्फार खान (फ्रंटियर गांधी) पर एक राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम वनएसबी के डी-ब्लॉक सेमिनार हॉल में हुआ। सेमिनार का मुख्य विषय था -“फ्रंटियर गांधी की विरासत: अहिंसा, सामाजिक न्याय और सौहार्द की समकालीन प्रासंगिकता”। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसके बाद कॉलेज के छात्र अभिमन्यु ने मधुर स्वर में गीत “वैष्णव जन तो तेने कहिए” गाया। इसके पश्चात महात्मा गांधी और फ्रंटियर गांधी के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया। खान अब्दुल गफ्फार खान के जीवन पर केंद्रित क फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई। सेमिनार में निम्नलिखित प्रमुख अतिथि और विशिष्ट उपस्थित थे –
•⁠ ⁠श्री बी.आर. पाटिल, उपाध्यक्ष, कर्नाटक राज्य नीति एवं योजना आयोग
•⁠ ⁠बी.टी. ललिता नायक, कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्तकर्ता
•⁠ ⁠श्री आर. रोशन बैग, पूर्व मंत्री, कर्नाटक
•⁠ ⁠इनामुल हसन, खुदाई खिदमतगार नेता एवं महासचिव, आरजीपीआरएस
•⁠ ⁠श्री आर. कलीमुल्लाह, शांति कार्यकर्ता, बेंगलुरु
•⁠ ⁠मंसूर चेटलू, समाजिक कार्यकर्ता
•⁠ ⁠कॉलेज प्राचार्य डॉ. हरिश्चंद्र एस. बी.
•⁠ ⁠बीबीए विभागाध्यक्ष डॉ. मधु
•⁠ ⁠बीसीए विभागाध्यक्ष डॉ. जोसफाइन प्रपुल्ला
•⁠ ⁠बीकॉम विभागाध्यक्ष मोहम्मद खिजरुल्ला

कार्यक्रम का स्वागत भाषण कॉलेज प्राचार्य डॉ. हरिश्चंद्र एस. बी. ने दिया। मुख्य वक्ता, प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक राजमोहन गांधी ने ऑनलाइन संबोधन किया। उन्होंने महात्मा गांधी और खान अब्दुल गफ्फार खान के बीच गहरे वैचारिक एवं व्यक्तिगत संबंधों पर प्रकाश डाला। दोनों के अहिंसक संघर्षों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में जब हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं और हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच विभाजन गहराता दिख रहा है, तब फ्रंटियर गांधी के विचारों पर गंभीर चिंतन की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने एचकेबीके कॉलेज और खुदाई खिदमतगार संगठन की इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सेमिनार आयोजन की पहल की खूब सराहना की। मुख्य अतिथि श्री बी.आर. पाटिल ने महात्मा गांधी और फ्रंटियर गांधी के संघर्षों पर प्रकाश डाला तथा कहा कि इन महान व्यक्तित्वों का संदेश एकता में विविधता की अद्भुत डोर प्रदान करता है। उन्होंने सेमिनार की प्रशंसा की और फ्रंटियर गांधी के विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर विशेष बल दिया। श्रीमती बी.टी. ललिता नायक ने अहिंसा के सिद्धांत को विस्तार से समझाया और इसे वर्तमान सामाजिक संदर्भों से जोड़ा। उन्होंने अहिंसा को भारतीय संस्कृति का मूल तत्व बताया और महात्मा गांधी व फ्रंटियर गांधी के वैचारिक सामंजस्य पर प्रकाश डाला। श्री आर. रोशन बैग ने बढ़ती हिंसा पर गहरा दुःख व्यक्त किया और महात्मा गांधी, मौलाना अबुल कलाम आजाद तथा जयप्रकाश नारायण जैसे महान नेताओं के अहिंसक संघर्षों का उल्लेख किया। उन्होंने सुझाव दिया कि बेंगलुरु में विभिन्न एनजीओ को साथ बुलाकर से ऐसे सेमिनार बड़े पैमाने पर आयोजित किए जाने चाहिए ताकि अधिक लोग लाभान्वित हो सकें और इससे गंभीर चर्चा हो। खुदाई खिदमतगार लीडर इनामुल हसन ने खान अब्दुल गफ्फार खान के जीवन का विस्तृत परिचय दिया और उनके तथा महात्मा गांधी के विचारों को वर्तमान चुनौतियों से जोड़ा। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि हमारे पूर्वजों द्वारा अपनाया गया अहिंसा और भाईचारे का मार्ग ही आज हमें अपनाना चाहिए। उन्होंने जनवरी 2026 के अंत में उत्तराखंड के कोटद्वार में हुई एक घटना का उदाहरण दिया, जहां जिम ट्रेनर दीपक ने भारी दबाव के बावजूद एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार की मदद की और भाईचारे का संदेश दिया। इसे उन्होंने सामाजिक सौहार्द का जीवंत उदाहरण बताया। छात्रों के लिए फ्रंटियर गांधी के जीवन, स्वतंत्रता संग्राम और अहिंसा के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती एक फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई, जो छात्रों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. विवेक कुमार साव और डॉ. लीलू कुमारी ने किया। प्रो. पवन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। सेमिनार में बड़ी संख्या में छात्रों और शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी की। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने न केवल चर्चा में हिस्सा लिया, बल्कि सीमांत गांधी और महात्मा गांधी के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और सम्मान भी व्यक्त किया।

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